History of Bhudoli
भूदोली गांव का संक्षिप्त इतिहास:--
भूदोली ग्राम के तवंर वंश के लोगों का निकास पाटन राजघराने की एक जागीर गांवड़ी से हुआ हैं। गांव गांवड़ी के ठाकुर साहब थे राव ऊदोजी जिन्होंने गांव गांवड़ी की स्थापना विक्रम संवत 1484 में की थी। ऊदो जी के पुत्र हुए श्री भिंवराज सिंह जी।
- राव ऊदोजी के सात रानियां थी
१:-दामोद कवंर ठाकुर साहब श्री एतराज सिंह जी की सुपुत्री थी, चौहान राजपूत, मकराना गांव।
इनके दो पुत्र हुए श्री लाखा जी एवं श्री सांगाजी
२:-पर्वत कवंर ठाकुर साहब श्री कुंभ सिंह जी की सुपुत्री थी, गौड राजपूत, मेरठ गांव
३:-करमत कवंर ठाकुर साहब श्री रूडमल सिंह जी की सुपुत्री निर्वाण राजपूत झांझी गांव
४:-सारंगदे कवंर ठाकुर साहब श्री हरि राज सिंह जी की सुपुत्री, चौहान राजपूत, महेशा गांव
५:-शेर कंवर ठाकुर साहब श्री माल सिंह जी की सुपुत्री, निर्वाण राजपूत, पपुरना गांव
६:-बीर कंवर ठाकुर साहब श्री हरपाल सिंह जी की सुपुत्री, बडगूजर राजपूत, मेहाड़ा गांव
७:-हर कंवर ठाकुर साहब श्री रावत सिंह जी की सुपुत्री, चौहान राजपूत, बंबोरी गांव।
इन सात रानियों के 22 पुत्र और एक पुत्री हुए।
इन 22 पुत्रों के नाम क्रमशः:-
१:-लाखा जी
२:-सांगा जी
३:- जीतो जी
४:-मान जी
५:- सुरजन जी
६:-नौवल जी
७:- गीयोजी
८:- उदो जी
९:- बिरजू जी
१०:- फितो जी
११:- हरि सिंह जी
१२:-अखोजी
१३:- कालू जी
१४:- फतो जी
१५:- चंदो जी
१६:- केतो जी
१७:-खड़ग जी
१८:- खेमजी
१९:- रतन जी
२०:-बाल जी
21:-बड़सी जी
२२:- बाग जी।
- इनके एक पुत्री थी चंद्र कंवर जिनकी शादी राजा पृथ्वीराज सिंह जी जो आमेर के राजा थे, के साथ हुई थी।
ठाकुर साहब श्री भीमराज सिंह जी के सबसे बड़े सुपुत्र श्री लाखा जी थे, वही उनके देवलोक गमन के बाद गांवड़ी के जागीरदार हुए।
लाखा जी की दो शादियां हुई थी:- १:-भगवती कवंर श्री रणधीर सिंह जी की सुपुत्री निर्वाण राजपूत खंडेला राज्य
२:-पार्वती कंवर ठाकुर साहब श्री सरदार सिंह जी की सुपुत्री सोलंकी राजपूत नाथूसर गांव।
इन दोनों रानियों के 5 पुत्र हुए जो क्रमशः:- १नरपल दास जी
२भगवान दास जी
३माधो दास जी
४ दुर्गा दास जी
५ डूंगर सिंह जी।
डूंगर सिंह जी के पांच रानियां थी जो निम्न हैं:-
१. भगवती कंवर श्री नाहर दास जी की सुपुत्री हाड़ा राजपूत करावर गांव बूंदी राज्य। इनके श्री उदय सिंह जी ने जन्म लिया था।
२. चंद्रावल कंवर ठाकुर साहब श्री पर्वत सिंह जी की सुपुत्री चान्दावत राठौर झीतराणा गांव
३उग्रवती कवंर ठाकुर साहब रोशन सिंह जी की सुपुत्री नरूका राजपूत राजोद गांव
४. लीला कंवर ठाकुर साहब श्री लादू सिंह जी की सुपुत्री सिकरवार राजपूत पहाड़ीगढ़ राज्य
५. वीर कवंर ठाकुर साहब इंदू सिंह जी की सुपुत्री पंवार राजपूत श्रीनगर गांव
इन 5 रानियों के 6 पुत्र हुए जो क्रम से निम्न हैं:- १.बीकाजी
२.किशन सिंह जी
३.बिशन सिंह जी
४.उदय सिंह जी
५.भोजराज सिंह जी
६.भीमराज सिंह जी।
श्री उदय सिंह जी के दो रानियां थी जो क्रमशः निम्न हैं:-
१:-श्रीमती ठुकरानी साहिबा ओमवती कवर ठाकुर साहब श्री काजल सिंह जी की सुपुत्री बणिरोत राजपूत (राठौर) साया गांव चूरू के पास। आप के दो पुत्र हुए क्रमशः नाहर दास जी, केशु दास जी।
२:-श्रीमती ठुकरानी साहिबा लाड़ कवंर ठाकुर साहब केतु सिंह जी की सुपुत्री नरूका राजपूत कालवाड़ गांव अलवर के पास।
आप के 4 पुत्र हुए जो क्रमशः निम्न है:-
देवादास जी, सूरजमल जी, रघु दास जी, नरसिंह दास जी।
श्री उदय सिंह जी महाराज राज श्री डूंगर सिंह जी के छोटे पुत्र थे, इनका निवास स्थान गावंडी था !
महाराज का जन्म विक्रम सम:1585 के लगभग माना जाता है !डूंगर सिहॅ जी वी.स. 1590 मे रायमल शेखावत व् हिन्दाल के बीच हुए युद्ध मैं काम आये ! उनके भाई श्री भीवराज सिहॅ का राज्य अभीषेक हुआ, मगर दूसरी रानी के पुत्र होने की वजह से आप के साथ भेदभाव होने लगा !अतः उनकी माता हाड़ी रानी उन्हें लेकर अपने पीहर करावल गांव बूंदी ले कर चली गई !
उदय सिहॅ जी का लालन पालन वही पर हुआ ! जब उदय सिहॅ जी 15 साल के हुए तो उन्होंने अपनी माता से आग्रह किया की हमे अपने देश चलकर भाई भीवराज सिहॅ से अपने राज्य का हिस्सा लेकर वही रहना चाहीये ! इस पर उनकी वीदुशी माता ने कहा की अपने पिता जी के स्वामी भगत सेवको मे से एक नाथूराम जी मीना को अपने साथ रखना !ये हर वक्त आप की रक्षा व देख रेख करते थे! श्री उदय सिहॅ जी गावड़ी पहुंचे तो आप के भाई भीवराज जी के द्वारा कहा गया की खंडेला राव(जो की उस समय निर्वाणो के अधीन था)हमारे राज्य की गायो को ले गाये हैं, अगर तुम उन्हें ले कर आ गये तो तुमे अधिकार दे दूंगा ! यह आज्ञा पा कर आप ने खंडेला पर आक्रमण करके गायो को मुक्त करा लिया ! वापस आते समय गावड़ी से (6 किलोमिटर) दो कोस पहले चंद्रभागा नदी के किनारे विश्राम करने लगे !
वहां आप ने श्री नाथूराम जी मीना को कहा की मेरा मन यहाँ पर बसने को करता है, तुम शगुन विचारो, श्री नाथूराम जी मीना एक स्वामी भक्त और बड़े विद्वान व्यक्ति थे, इस पर श्री नाथूराम जी मीना ने शगुन विचारे और बताया महाराज आपके यहाँ हमेशा खांडे जीत रहेगी व संम्पन गाँव रहेगा ! तब सभी सत्यों सहित आप गावड़ी पधारे और कुछ समय बाद 1627 वी.सम. मैं गाँव (भूदोली)बसाया !
महाराज उदय सिंह की दो शादीयाँ हुई
दोनों रानीयों से कोई संतान ना होने पर अपने भाई के लड़के भगवानदास जी को गौद लीया ! संयोग से गौद संस्कार होने के बाद दोनों रानीयों के छः पुत्र हुए जिनके नाम क्रमशः नाहर दास जी, केशव दास जी, देवदास जी, सूरजमल जी, रघु दास जी, नरसिंह दास जी ! आप के पुत्र होने पर भगवानदास जी (दत्तक पुत्र) ने कहा की मैं अब यहाँ नहीं रहूँगा !और श्री भगवानदास जी ने चीपलाटा की जागीर प्राप्त की !
भूदोली के गाँव :-
आगवाडी,कुरबडा,उदय नगर ,पिचाणी (कोटपुतली के पास),माल्यावाली(माल नगर), झीराना,खोरा,ढाणी हरी सिहॅ,ढाणी बहादुर सिहॅ,नालिवाला हैं, इन सभी गाँव मैं उदय सिहॅ जी के वंसज रहते हैं !
मृत्यु:- उदय सिहॅ जी मृत्यु विक्रम संवत 1652 के लगभग धोखे से हुई थी ! जब आप अपने बड़े भाई से मिलने गावड़ी गए तो ब्रह्मण कन्या द्वारा आपको जहर दे दिया गया !आप अपने अनुचरो सहित भूदोली आ रहे थे तब आप को आभास हो गया और आप ने कहा की मेरा घोडा जहाँ रुके वहीँ पर मुझे तपना दिया जाये !
घोडा महान ऋषि श्रीउद्दालक मुनि की धुनी पर आकर रुक गया ,वही पर आप को श्री भगवानदास जी द्वारा तपना(दाह संस्कार) दिया गया !उस दिन भाद्रपद अमावस्या थी !इस दिन आप की पुन्य तिथी पर मेला लगता है ! इसी स्थान पर आप का भव्य मंदिर विक्रम संवत 1656 में बनया गया !आप की पूजा लोक देवता की रूप मे की जाती है। साभार:- कुॅवर जितेन्द्र सिहॅ तोमर (उदय नगर) भूदोली जिला सीकर (राजः)
References
This article "History of Bhudoli" is from Wikipedia. The list of its authors can be seen in its historical and/or the page Edithistory:History of Bhudoli. Articles copied from Draft Namespace on Wikipedia could be seen on the Draft Namespace of Wikipedia and not main one.
